Tuesday, January 24, 2023




रवायतें बदल रहीं हैं ज़माने की,
मिलने-जुलने, बुलाने, मनाने, बतियाने की 
नए तरीकें हैं नए ज़माने वालों  के,
मिलने, जुलने, बुलाने, मनाने बतियाने वालों के 

के वॉल पर मेरी आइयेगा साहब 
के हो सके लाइव हूँ जब तो कमेंट कर जाइएगा आप 
बस रील को मेरी दिल वाला लाइक कर दीजियेगा जनाब 
स्टोरी को मेरी हार्ट वाला बूस्ट करियेगा महाराज 

ज़ूम पर मिलकर वर्चुअल हैप्पी ऑवर करते हैं आज 
दो- चार जाम छलकाते हैं साथ 
कुछ सुनतें हैं, कुछ दिल की सुनाते हैं आज 
कार वाले बार के किस्सों पर हँसतें हैं बेहिसाब 

चलो इन मुएँ फोनों, लैपटॉपों का 
कुछ तो फायदा हुआ 
स्क्रीन के उस तरफ से मटर छीलती माँ बोली आज 
Happy Birthday बिटिया 
पिनटेरेस्ट से देखकर, बनाया है तेरा स्वेटर ख़ास 

Thursday, April 2, 2020

 खुद से मिलने के लिए महफ़िल सजाइये,
अब  तो भूले बिसरे इस  शहर में भी जाइये
कुछ सुने मन की, कुछ अपनी फरमाइये
दिल खोल के इस  बिछड़े दोस्त से अब बतियाइये
चाहे चुपचाप मुस्कुराइए, चाहे शर्माइये
आईने को ठेंगा दिखा, चाहे बाल बिखराइये
तारीख और दिन का हिसाब किताब भूल जाइये
सोमवार को शनिवार का थ्रो बैक बताइये
अधूरी पेंटिंग को पूरा करने के लिए ब्रश चलाइये
कुछ नया लिखने के लिए कलम उठाइये
फेड हुई पर उस ख़ास टी- शर्ट को पहन नोस्टालजिक हो जाइये
या फिर एकदम चमक कर और चमका कर
कैंडल लाइट डिनर का स्वांग रचाइये
बस  कुछ दिन तो
खुद से मिलने के लिए महफ़िल सजाइये
 लेकर मैं चलती हूँ शामें कितनी,
बिन  सीमा की रेखा  वाली
जोड़ती रहती हूँ अक्षर अक्षर
कहानियाँ कितनी उमंगों वाली