Wednesday, April 22, 2026

मेरी परछाई

मौन संगिनी 

निराकार, सर्व रूप साकरिणी 

चन्द्रकला सी चंचला 

श्रम सारिणी 

भोर जागृत उद्यमी 

सह पथ गामिनी 

मेरी पग बन्दिनी 

पर मेरी चिर-सखी 

कौन? मेरी परछाई 

रिहाई

बह जाने दो 

इन अश्कों को अब,

थक चुकी पलकों से 

इनकी रिहाई लाज़िमी है अब 

झूठी मुस्कान पहने चेहरे पर 

इनका नमक उधार है कब से