के मैं जोड़-घटाव हूँ
उन सब लम्हों का जो मुझसे होकर गुज़रे, मैंने देखे, सुने या सुनाए
उन सब बातों का जो कभी कही मैंने, या उनका जो नहीं कही मैंने
उन किस्सों का जो मुझे सुनाये गए, मैंने सुने, या उन किस्सों का जो नहीं सुने
उन खुशबुओं का जो बस गयी मुझमें, या जो पीछे छूट गयी
उन यादों का जो याद रही, या भूल गयी
उन रिश्तों का जो बने रहे या बिखर गए
उन दहलीज़ों, रास्तों, आँसुओं, उड़ानों, और मुस्कानों का जो मिलती रही डगर-डगर
के मैं जोड़ घटाव हूँ उन मौसमों का,
उन बारिशों का जो मीलों का सफर तय कर पहुँची मुझ तक
के मैं जोड़ घटाव हूँ उन अक्षरों का, जो शब्द बन गए मेरे लिए
उन उम्मीदों का जो मैंने की, या की गयी मुझसे
के मैं जोड़-घटाव हूँ उन सब आशीषों का जो बने रहे साथ सदा