Tuesday, June 3, 2025

कनखियों से देखना तुम्हारा

नज़र भर देखना तुम्हारा,

या उसी नज़र का ठहर जाना, 

कनखियों से देखना तुम्हारा , 

पल भर को नजरें मिलाना 

और चोरी पकड़ी गयी हो जैसे, ऐसे मुस्कुराना

बस श्रृंगार का मेरे इतना सा ठिकाना 

मुझसे सारी दुनिया तुम्हारी, तुमसे मेरा सारा ज़माना..

तेरी सूरत

एक दौर वो भी था ,

 जब खयालों का ठिकाना बस चेहरा तेरा ही था 

और इक दौर ये भी है के हज़ार कोशिश करने पर भी सूरत तेरी याद आती नहीं

ओ रे आम तू आम रहे

तू आम है, पर आम नही

हर मौसम की तू शाम नहीं 

कभी खट्टा, कभी मीठा सा,

पहले प्यार में लिखे गीत सा 

गालों पर तेरे ये जो शोख़ी है 

मिठास में तेरी, ये जो मदहोशी है 

तेरे केसरी कतरों से, तेरे नाज़ुक नखरों  से 

तेरे सिंदूरी हो जाने से 

तेरे मलीहाबाद और बनारस से चले आने से 

गर्मियों की सुबहें, गर्मियों की शामें यादगार हैं 

ओ रे आम तू आम रहे 

तेरे बाग़ तेरे बग़ीचे 

तेरी नस्लें तेरी फसलें गुलज़ार रहें 

के तू आम है 

पर आम नहीं 

और सुन भाई आम 

तू ख़ास रहे पर आम रहे!