Wednesday, April 22, 2026

रिहाई

बह जाने दो 

इन अश्कों को अब,

थक चुकी पलकों से 

इनकी रिहाई लाज़िमी है अब 

झूठी मुस्कान पहने चेहरे पर 

इनका नमक उधार है कब से 


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