Tuesday, April 28, 2026

तसव्वुर

के एक आसमान है, पहुँच जाती हूँ जहाँ मैं, आंखें जो बंद कर लूँ तो 

ख़्वाब जहाँ जुड़ जुड़ कर, चढ़ते हैं पायदान अब भी

तसव्वुर में घर है मेरा वहाँ एक, हर कमरा जिसका

सजा है उन सारे साज़ों- सामान से, जो हो सकती थी कभी हक़ीक़त भी

पर लौट-लौट आती हूँ तुम्हारे पास, 

के खुली आँखों वाली हक़ीक़त, दिल के ज़्यादा करीब जो है

Wednesday, April 22, 2026

मेरी परछाई

मौन संगिनी 

निराकार, सर्व रूप साकरिणी 

चन्द्रकला सी चंचला 

श्रम सारिणी 

भोर जागृत उद्यमी 

सह पथ गामिनी 

मेरी पग बन्दिनी 

पर मेरी चिर-सखी 

कौन? मेरी परछाई 

रिहाई

बह जाने दो 

इन अश्कों को अब,

थक चुकी पलकों से 

इनकी रिहाई लाज़िमी है अब 

झूठी मुस्कान पहने चेहरे पर 

इनका नमक उधार है कब से